नारायणपुर। ‘सुशासन आपके द्वार’ अभियान के तहत जिला प्रशासन की टीम ने अबूझमाड़ के अत्यंत दुर्गम क्षेत्र आलबेड़ा में पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। कस्तूरमेटा से 25 से 30 किलोमीटर का कठिन सफर तय करते हुए प्रशासनिक अमला पहाड़ी रास्तों, घने जंगलों तथा नदी नालों को पार कर गांव तक पहुंचा। अधिकारियों ने पहले मोटरसाइकिल और फिर पैदल चलकर गांव तक पहुंच सुनिश्चित की। ग्राम पंचायत कुतूल के ग्राम आलबेड़ा में प्रशासन के पहुंचने पर ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति रिवाजों, लोकगीतों और मांदरी की थाप के साथ आत्मीय स्वागत किया। कलेक्टर नम्रता जैन ने ग्रामीणों के साथ बैठकर पारंपरिक पेज-भात का भोजन किया। वहीं कक्षा तीसरी की छात्रा सुखमती ने कलेक्टर बनने की इच्छा जताकर सभी को भावुक कर दिया।

बाइक से पैदल तक: 25-30 किमी का संघर्षपूर्ण सफर 
14 अप्रैल 2026 को जिला प्रशासन की टीम ‘सुशासन आपके द्वार’ अभियान के अंतर्गत अबूझमाड़ के अत्यंत दुर्गम क्षेत्र आलबेड़ा पहुंची। कस्तूरमेटा से आलबेड़ा की दूरी लगभग 25 से 30 किलोमीटर है। यह रास्ता आसान नहीं था। प्रशासनिक अमले को पहाड़ी रास्तों, घने जंगलों तथा नदी नालों को पार करना पड़ा। इस दौरान अधिकारियों ने पहले मोटरसाइकिल से जितना संभव हो सका सफर तय किया। इसके बाद पगडंडियों पर पैदल चलकर गांव तक पहुंच सुनिश्चित की। यह दिखाता है कि भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद शासकीय सेवाओं को अंतिम गांव तक पहुंचाने के लिए प्रशासन कितना प्रतिबद्ध है।

मांदरी की थाप और लोकगीतों से हुआ आत्मीय स्वागत 
ग्राम पंचायत कुतूल के ग्राम आलबेड़ा में जब प्रशासनिक टीम पहुंची तो ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। कलेक्टर का यह प्रथम आगमन था। ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ टीम का स्वागत किया।
महिलाओं ने लोकगीत गाए और युवाओं ने मांदरी की थाप पर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। इस आत्मीय स्वागत ने सरकारी अमले और गांव के बीच की दूरी को खत्म कर दिया। सरपंच कुतूल रामजी वरदा ने बताया कि प्रशासन के इस तरह गांव पहुंचने से आपसी विश्वास और संवाद को और मजबूती मिली है।

पेड़ के नीचे लगी चौपाल, पेज-भात से बना अपनापन 
शिविर के दौरान प्रशासनिक टीम ने किसी भवन या मंच का इंतजार नहीं किया। सीधे पेड़ के नीचे ग्राम चौपाल लगाई गई। कलेक्टर नम्रता जैन सहित सभी अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उनसे सीधे संवाद किया। इस अवसर का सबसे खास पल वह रहा जब कलेक्टर नम्रता जैन एवं प्रशासनिक टीम ने ग्रामीणों के साथ बैठकर पारंपरिक पेज-भात का भोजन ग्रहण किया। एक ही पंक्ति में, एक ही पत्तल पर भोजन करने से प्रशासन और ग्रामीणों के बीच आत्मीयता का वातावरण बना। इससे ग्रामीण खुलकर अपनी बात रख पाए।

सुखमती का सपना: ‘मैं भी कलेक्टर बनूंगी’ 
दौरे के दौरान एक प्रेरणादायक क्षण सामने आया। गांव की कक्षा तीसरी की छात्रा सुखमती ने कलेक्टर नम्रता जैन से संवाद किया। मासूमियत के साथ लेकिन पूरे आत्मविश्वास से सुखमती ने कहा कि वह भविष्य में स्वयं कलेक्टर बनना चाहती है।  इस दृढ़ अभिव्यक्ति ने वहां उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया। यह घटना संदेश देती है कि प्रशासन के ऐसे प्रयास बच्चों के सपनों को नई दिशा दे रहे हैं। जिस अबूझमाड़ में कभी डर का माहौल था, वहां अब बच्चियां अफसर बनने का सपना देख रही हैं।

कलेकटर नम्रता जैन और कलेक्टर बनने का सपना संजोए सुखमति की तस्वीर

जनचौपाल में रखी गईं ये प्रमुख मांगें 
जनचौपाल में ग्रामीणों ने अपनी मूलभूत जरूरतों से जुड़ी मांगें प्रशासन के सामने रखीं। प्रमुख मांगें इस प्रकार रहीं:  बारहमासी सड़क निर्माण आवागमन हेतु, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, विद्युत कनेक्शन और निर्बाध आपूर्ति, मोबाइल नेटवर्क की सुविधा, स्कूल में शिक्षक और बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य केंद्र और नियमित डॉक्टर जैसी मांगे प्रमुख रही।कलेक्टर नम्रता जैन ने सभी मांगों को गंभीरता से सुना। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक निर्देश दिए और समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए आश्वस्त किया।

शिविर में लगे विभागीय स्टॉल, मिली योजनाओं की जानकारी 
आलबेड़ा में लगे शिविर में स्वास्थ्य, खाद्य, राजस्व एवं महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा स्टॉल स्थापित किए गए। इन स्टॉलों के माध्यम से ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। बीपी, शुगर जैसी सामान्य जांच के साथ मौसमी बीमारियों की जांच भी की गई। जरूरतमंद ग्रामीणों को मौके पर ही आवश्यक औषधियों का वितरण किया गया। खाद्य विभाग ने राशन कार्ड और PDS से जुड़ी जानकारी दी। महिला एवं बाल विकास विभाग ने पोषण और मातृत्व योजनाओं के बारे में बताया।

उपस्थित अधिकारी और प्रशासन का संकल्प 
इस अवसर पर सरपंच कुतूल रामजी वरदा, एसडीएम ओरछा डॉ. सुमित गर्ग, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी लोकेश चतुर्वेदी, खाद्य अधिकारी, एपीओ पवन कुमार सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। जिला प्रशासन ने अवगत कराया कि ‘सुशासन आपके द्वार’ अभियान के माध्यम से दुर्गम क्षेत्रों तक शासकीय सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद विकास कार्यों को गति दी जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी गांव, कोई भी व्यक्ति शासन की योजनाओं से वंचित न रहे।

कस्तूरमेटा से आलबेड़ा तक का 25 से 30 किलोमीटर का सफर सिर्फ दूरी का पैमाना नहीं है, बल्कि यह प्रशासन की इच्छाशक्ति का पैमाना है। पहाड़, नदी नाले और पगडंडियां जब अफसरों के हौसले को नहीं रोक पाईं, तो यह साफ संदेश गया कि अब अबूझमाड़ अब ‘अबूझ’ नहीं रहेगा। पेड़ के नीचे लगी चौपाल और पेज-भात पर हुआ संवाद बताता है कि सुशासन फाइलों से नहीं, जमीन पर बैठने से आता है। कक्षा तीसरी की सुखमती का कलेक्टर बनने का सपना इस बात का सबूत है कि जब प्रशासन खुद चलकर गांव पहुंचता है तो अगली पीढ़ी के हौसले भी बढ़ते हैं।

By आकाश सिंह

आकाश सिंह ठाकुर खोजी पत्रकार | नारायणपुर, छत्तीसगढ़ आकाश सिंह ठाकुर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के निवासी हैं और विगत 5 वर्षों से सक्रिय रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं। वे आदिवासी अंचलों, अबूझमाड़ क्षेत्र और बस्तर संभाग से जुड़ी स्थानीय, सामाजिक, प्रशासनिक, सांस्कृतिक एवं जमीनी खबरों को प्रमुखता से देश-दुनिया के सामने लाने का कार्य कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग, जनसमस्याओं की पड़ताल, प्रशासनिक गतिविधियों की निष्पक्ष रिपोर्टिंग और हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ को मंच देना उनकी पत्रकारिता की पहचान है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, आदिवासी समाज, ग्रामीण विकास और सामाजिक सरोकारों पर उनकी विशेष पकड़ मानी जाती है। सत्य, निष्पक्षता और जनहित को केंद्र में रखकर पत्रकारिता करना उनका मूल उद्देश्य है।

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