जगदलपुर: छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय कला के लिए विश्व विख्यात है, अब एक नई वैश्विक पहचान गढ़ रहा है। यह पहचान है— ‘नवाचार और आत्मनिर्भरता’ की। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (SMKV), बस्तर ने कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव के दूरदर्शी नेतृत्व में एक ऐसी शैक्षणिक क्रांति का सूत्रपात किया है, जहाँ विद्यार्थी केवल डिग्री लेकर कैंपस से बाहर नहीं निकल रहे, बल्कि एक ‘उद्यमी’ (Entrepreneur) बनकर समाज को नई दिशा दे रहे हैं। विश्वविद्यालय ने अपनी स्वयं की स्टार्टअप कंपनी ‘एसएमकेवी इंक्यूबेशन एंड स्टार्टअप फाउंडेशन’ पंजीकृत कर बस्तर के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है। प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों जैसे आईआईटी भिलाई और एनआईटी रायपुर के साथ मिलकर विश्वविद्यालय अब बस्तर के युवाओं को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा के योग्य बना रहा है। 

विजनरी पहल: विश्वविद्यालय की अपनी कंपनी और संस्थागत ढांचा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के सपनों को धरातल पर उतारने के लिए विश्वविद्यालय ने एक साहसिक कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने भारत सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में ‘एसएमकेवी इंक्यूबेशन एंड स्टार्टअप फाउंडेशन’ नाम से एक गैर-सरकारी कंपनी पंजीकृत की है।
कानूनी मान्यता:  यह कंपनी ‘कंपनी अधिनियम 2013’ की धारा 8 के तहत रजिस्टर्ड है, जो लाभ कमाने के बजाय सेवा और नवाचार पर केंद्रित है।
नेतृत्व: इस कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में स्वयं कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव, कुलसचिव डॉ. राजेश लालवानी और सहायक कुलसचिव केजूराम ठाकुर शामिल हैं।
उद्देश्य: कंपनी का प्राथमिक लक्ष्य विद्यार्थियों को स्वरोजगार के लिए तैयार करना, उनके नए आइडिया को मेंटरशिप देना और निवेश के लिए निवेश फाइनेंस उपलब्ध कराना है।

ग्लोबल नेटवर्किंग: आईआईटी और एनआईटी के साथ रणनीतिक समझौते
बस्तर के युवाओं को विश्वस्तरीय तकनीक और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालय ने कई महत्वपूर्ण एमओयू (MoUs) किए हैं:
आईआईटी भिलाई (IIT Bhilai) के साथ साझेदारी: इस ऐतिहासिक समझौते के तहत आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने घोषणा की है कि वे शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय को अच्छे विजन वाले प्रोजेक्ट्स के लिए 5 करोड़ रुपये की फंडिंग देंगे। इसके साथ ही, बस्तर के छात्र आईआईटी भिलाई की प्रयोगशालाओं और तकनीकी विशेषज्ञों से सीधे जुड़ सकेंगे।
एनआईटी रायपुर (NIT Raipur) के साथ तकनीक का संगम: एनआईटी रायपुर और SMKV के बीच हुए समझौते से बस्तर के उद्यमियों को ‘टेक्नोलॉजी कमर्शियलाइजेशन’ और ‘नेटवर्क साझा’ करने में सहायता मिलेगी। इससे क्षेत्रीय उत्पादों को तकनीकी रूप से उन्नत बनाकर वैश्विक बाजार में उतारा जा सकेगा।
क्षेत्र-वार कौशल विकास: प्रयोगशाला से कार्यस्थल तक (Exposure Visits)
विश्वविद्यालय का मानना है कि वास्तविक शिक्षा केवल कक्षाओं में नहीं, बल्कि कार्यक्षेत्र में मिलती है। इसके लिए आईआईसी (IIC) इकाई के तहत विभिन्न एक्सपोजर विजिट आयोजित किए गए:
उन्नत कृषि और मशरूम उत्पादन: विवि के 93 विद्यार्थियों ने शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय की ‘प्री-इंक्यूबेशन यूनिट’ का दौरा किया, जहाँ उन्होंने मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और तीखूर प्रसंस्करण की आधुनिक विधियां सीखीं।

रेशम पालन में नवाचार: रूरल टेक्नोलॉजी और जूलॉजी के छात्रों ने सेंट्रल सिल्क बोर्ड का भ्रमण कर मिट्टी परीक्षण और सिल्क कीट पालन की आधुनिक प्रक्रियाओं को समझा।
मत्स्य पालन तकनीक: समाजशास्त्र विभाग के छात्रों ने कृषि विज्ञान केंद्र में ‘केज कल्चर’ और ‘बायो पलाक’ तकनीक से मछली पालन की संभावनाओं को तलाशा।
वेस्ट टू वेल्थ ( MRC विज़िट):  लगभग 50 छात्रों ने नकटी सेमरा स्थित रिसाइकिलिंग सेंटर का दौरा किया। यहाँ उन्होंने देखा कि कैसे प्रतिदिन 3 टन प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस कर दो टन प्लास्टिक दाना (ग्रेन्यूल्स) बनाया जा रहा है, जिसका उपयोग खिलौने और कुर्सियां बनाने में होता है।
 कानूनी और वित्तीय साक्षरता: स्टार्टअप के मजबूत स्तंभ
किसी भी नए उद्यम को सफल बनाने के लिए उसके कानूनी और वित्तीय पहलुओं की जानकारी होना अनिवार्य है:
बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR): विवि ने कई ऑनलाइन वर्कशॉप के माध्यम से विद्यार्थियों को पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और ‘डिजाइन एक्ट’ के बारे में जागरूक किया है। उन्हें बताया गया कि पेटेंट के माध्यम से वे अपने नवाचार को 20 वर्षों तक सुरक्षित कर सकते हैं।
बिजनेस मॉडल कैनवास:स्टेट डिजिटल कंसल्टेंट अतुल प्रधान ने विद्यार्थियों को ‘बिजनेस मॉडल’ तैयार करने के 7 व्यावहारिक नियम सिखाए, ताकि वे अपने स्टार्टअप को लाभप्रद बना सकें।
फंडिंग के गुर:कंपनी सेक्रेटरी रौनक राठी ने विद्यार्थियों को ‘बूटस्ट्रैपिंग’, ‘एंजेल इन्वेस्टमेंट’ और ‘गवर्नमेंट ग्रांट’ जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी, ताकि फंडिंग की कमी स्टार्टअप के आड़े न आए।
नारी शक्ति और ग्लोबल मार्केटिंग: लास एंजिल्स से बस्तर तक
विश्वविद्यालय ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क स्थापित किया है:
अमेरिकी प्रोफेसरों द्वारा ट्रेनिंग: आईआईटी भिलाई और SMKV के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में अमेरिका की लोयोला मैरीमाउंट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मधु विश्वनाथन ने बस्तर संभाग की 395 आदिवासी महिलाओं को ‘मार्केटप्लेस साक्षरता’ (Marketplace Literacy) सिखाई। उन्होंने महिलाओं को ग्राहक व्यवहार और बाजार के अवसरों से जोड़ने के व्यावहारिक गुण साझा किए।

लया हाटूम (Laya Hatum): महिला दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं के 14 समूहों ने स्टार्टअप मॉडल के रूप में बस्तरिया व्यंजनों और हस्तशिल्प के स्टॉल लगाए। यहाँ उन्होंने ‘डिमांड और सप्लाई’ के व्यावहारिक गणित को समझा।
बस्तर आर्ट और हस्तशिल्प मेला: “बस्तर मेरी नज़र से”
विश्वविद्यालय ने कला और व्यवसाय के संगम के लिए तीन दिवसीय हस्तशिल्प एवं कला मेले का आयोजन किया। आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने इस दौरान कहा कि “ट्राइबल कल्चर ही असली भारतीय कल्चर है” और इसमें विज्ञान के गहरे संदेश छिपे हैं। मेले में युवा कलाकारों ने बस्तर की संस्कृति और आधुनिक नवाचार का अद्भुत प्रदर्शन किया।
विज्ञान और शोध की नई चेतना
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर में ‘विज्ञान तीर्थ दर्शन‘ अभियान शुरू करने की ऐतिहासिक घोषणा की। इसके तहत युवा वैज्ञानिकों को देश के प्रतिष्ठित अनुसंधान केंद्रों का भ्रमण कराया जाएगा, ताकि बस्तर में शोध और अनुसंधान की परंपरा और भी सशक्त हो सके।

शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर अब केवल शिक्षा प्रदान करने वाला केंद्र नहीं रहा, बल्कि यह ‘विकसित छत्तीसगढ़’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का एक ऊर्जावान इंजन बन चुका है। कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव का विजन है कि बस्तर का हर युवा अपने स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर एक सफल उद्यमी बने। जिस तरह से विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय संस्थानों, सरकार और स्थानीय समाज के साथ मिलकर काम कर रहा है, वह दिन दूर नहीं जब ‘बस्तर मॉडल’ पूरे देश के लिए स्टार्टअप की एक नई मिसाल बनेगा।

**स्रोत:** आधिकारिक विश्वविद्यालय रिपोर्ट एवं अखबारों की कतरनें

By आकाश सिंह

आकाश सिंह ठाकुर खोजी पत्रकार | नारायणपुर, छत्तीसगढ़ आकाश सिंह ठाकुर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के निवासी हैं और विगत 5 वर्षों से सक्रिय रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं। वे आदिवासी अंचलों, अबूझमाड़ क्षेत्र और बस्तर संभाग से जुड़ी स्थानीय, सामाजिक, प्रशासनिक, सांस्कृतिक एवं जमीनी खबरों को प्रमुखता से देश-दुनिया के सामने लाने का कार्य कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग, जनसमस्याओं की पड़ताल, प्रशासनिक गतिविधियों की निष्पक्ष रिपोर्टिंग और हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ को मंच देना उनकी पत्रकारिता की पहचान है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, आदिवासी समाज, ग्रामीण विकास और सामाजिक सरोकारों पर उनकी विशेष पकड़ मानी जाती है। सत्य, निष्पक्षता और जनहित को केंद्र में रखकर पत्रकारिता करना उनका मूल उद्देश्य है।

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