110 किमी का दुर्गम सफर, नदी-नालों की बाधा और बच्चों के साथ ‘जन-गण-मन’ की गूंज; पढ़िए कलेक्टर नम्रता जैन के अनूठे प्रयास की कहानी।

अक्सर हम प्रशासनिक अधिकारियों को एसी कमरों या सरकारी गाड़ियों के काफिले में देखते हैं, लेकिन नारायणपुर जिले में इन दिनों तस्वीर कुछ अलग है। यहाँ प्रशासन सिर्फ फाइलों में नहीं, बल्कि ‘बाइक’ पर चलता या कहें हर उस साधन का उपयोग करता है जिससे अंतिम पंक्ति सुदूर अबूझमाड़ में मौजूद व्यक्ति तक पहुंच पाए। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं कलेक्टर नम्रता जैन की, जिन्होंने 15 जनवरी को लक्ज़री वाहनों को छोड़कर बाइक के सहारे निकल पड़ीं 110 किलोमीटर के उस सफर पर, जहाँ रास्ता कम और चुनौतियां ज्यादा हैं। मकसद था—’नियद नेल्ला नार’ (आपका अच्छा गाँव) योजना की जमीनी हकीकत और उसके दावों के सच की पड़ताल करना।


जंगल, झाड़ और जज़्बा:
कलेक्टर नम्रता जैन का यह दौरा कोई सामान्य निरीक्षण नहीं था। उन्होंने बाइक से कच्चे रास्तों, घने जंगलों और उफनते नदी-नालों को पार करते हुए अबूझमाड़ के बेहद संवेदनशील नक्सल प्रभावित गांवों—ढोंढरबेड़ा, कुड़मेल और जाटलूर में दस्तक दी। इस दौरान कलेक्टर ने जमीनी स्तर पर नियाद नेल्लानार योजना और अन्य योजनाओं की स्थिति को टटोलने के साथ साथ अबूझमाड़ में शिक्षा,स्वास्थ्य और पोषण की स्थित सुधार की दिशा में अहम निर्देश दिए इसके अतिरिक्त सड़क निर्माण सहित अन्य निर्माण कार्यों का अवलोकन भी किया। इस दौरान उनके साथ एडिशनल एसपी अजय कुमार और पीडब्ल्यूडी व पीएमजीएसवाई के अधिकारी भी मौजूद रहे।


जब गूंजा राष्ट्रगान, बदल गया माहौल:
ग्राम कुड़मेल और जाटलूर के बालक आश्रमों में नजारा देखने लायक था। कलेक्टर ने न केवल व्यवस्था जांची, बल्कि बच्चों के साथ सुर में सुर मिलाकर राष्ट्रगान भी गाया। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में गूंजता ‘जन-गण-मन’ यह बताने के लिए काफी था कि अब यहाँ डर नहीं, उम्मीदों का सवेरा हो रहा है।


‘क्लास’ भी ली और हौसला भी बढ़ाया:
ढोंढरबेड़ा: यहाँ भोजन, पानी और टॉयलेट की व्यवस्था देखी। जब सब संतोषजनक मिला, तो बच्चों की पीठ थपथपाई। साथ ही अधीक्षक को नए टॉयलेट और खेल सामग्री का प्रस्ताव बनाने का ऑर्डर दिया।
कुड़मेल: यहाँ बच्चों की सेहत का ख्याल रखते हुए मच्छरदानी के सख्त निर्देश दिए। इतना ही नहीं, गांव के पढ़े-लिखे युवा मोतीलाल वडडे को ‘अतिथि शिक्षक’ बनने के लिए प्रेरित कर रोजगार और शिक्षा का नया मॉडल पेश किया।
जाटलूर: यहाँ बच्चों को यूनिफॉर्म बांटी और ग्रामीणों की मांग पर देवगुड़ी, गोटुल शेड और राशन दुकान जैसी बुनियादी जरूरतों को जल्द पूरा करने का भरोसा दिया।


कलेक्टर नम्रता जैन का यह बाइक वाला सफर महज एक यात्रा नहीं, बल्कि प्रशासन के आत्मविश्वास का प्रतीक है। 110 किलोमीटर का यह फासला तय कर उन्होंने यह संदेश दिया है कि ‘नियद नेल्ला नार’ योजना केवल कागजों में नहीं, बल्कि अबूझमाड़ की जमीन पर उतर रही है। जब प्रशासन खुद चलकर अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचता है, तो बदलाव की बयार बहनी तय है।
