कहते हैं जब रास्ता सही मिल जाए, तो मंजिल अपने आप खूबसूरत हो जाती है। नारायणपुर के अबूझमाड़ में आज कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। जो कदम कभी मुख्यधारा से दूर भटक गए थे, आज वही कदम ‘शांति की दौड़’ में सबसे आगे नजर आए।

अबूझमाड़ पीस मैराथन 2026 के प्रचार-प्रसार के लिए आज नारायणपुर में आत्मसमर्पित नक्सलियों ने एक विशेष दौड़ लगाई।
अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार नारायणपुर से आई तस्वीरें गवाह हैं उस बदलते हुए अबूझमाड़ की, जिसकी कल्पना हम सब ने की थी। स्थान है जिला परियोजना लाइवलीहूड कॉलेज का पुनर्वास केंद्र और तारीख 14 जनवरी 2026। यहाँ आज सुबह का सूरज एक नई उम्मीद लेकर उगा। समाज की मुख्यधारा में लौट चुके आत्मसमर्पित हितग्राहियों या कहें आत्मसर्पित नक्सलियों (Surrendered Beneficiaries) ने आज यह साबित कर दिया कि वे अब ‘नए भारत’ के निर्माण में कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार हैं। आने वाले दिनों में होने वाली ऐतिहासिक ‘अबूझमाड़ पीस मैराथन 2026’ के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए इन युवाओं ने 5 किलोमीटर की दौड़ लगाई। इस दौड़ में सिर्फ रफ्तार नहीं थी, बल्कि एक संकल्प था—हिंसा को छोड़कर संवाद का, और डर को पीछे छोड़कर उम्मीद की ओर बढ़ने का। इस मौके पर एसपी सुमित गर्ग, डीएसपी आशीष नेताम और नायब तहसीलदार विजय साहू जैसे अधिकारी न केवल मौजूद रहे, बल्कि उन्होंने इन युवाओं का हौसला भी बढ़ाया। सहायक संचालक मानक लाल अहिरवार और लाइवलीहूड कॉलेज की टीम ने इसे केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि ‘विश्वास बहाली’ की एक बड़ी जीत बताया।
यह 5 किलोमीटर का सफर यह संदेश देने के लिए काफी था कि अब अबूझमाड़ की पहचान ‘बंदूक’ नहीं, बल्कि ‘खेल और विकास’ होगी।

नारायणपुर का यह पुनर्वास केंद्र आज गवाह बना है कि अगर सही मौका मिले, तो बड़े बदलाव निश्चित है। आज की यह दौड़ ‘अबूझमाड़ पीस मैराथन 2026’ के लिए सिर्फ एक प्रोमोशन नहीं थी, बल्कि यह ऐलान था कि अबूझमाड़ अब शांति के पथ पर सरपट दौड़ने को तैयार है।
प्रशासन ने अपील की है कि जिले के नागरिक भी इस शांति महायज्ञ यानी पीस मैराथन 30 जनवरी 2026 में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
